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राम नाम गुणगान करूं मैं -स्नेहलता द्विवेदी

राम नाम गुनगान करूँ मैं

राम हैं संयम राम धर्म हैं,
राम का अद्भुत नाम कहूँ मैं।
राम हैं मर्यादा के रक्षक,
राम को सीताराम कहूँ मैं।

राम नाम गुनगान करूँ मैं,
स्वयं का जब सम्मान करूँ मैं!

राम जगत को राह दिखायें,
चलना सुबह शाम कहूँ मैं।
भय और भूख है कहीं नही तो,
बोलो जय श्री राम कहूँ मैं।

राम नाम गुनगान करूँ मैं,
स्वयं का जब सम्मान करूँ मैं!

छद्म मुक्त जब जीवन होगा,
राम का तन में बास कहूँ मैं।

निर्मल तन- मन धर्म निरत हो,
राम के सुंदर पाठ कहूँ मैं।

राम नाम गुनगान करूँ मैं,
स्वयं का जब सम्मान करूँ मैं!

त्याग तपस्या सहज रहे जब,
प्रेम परस्पर साथ कहूँ मैं।
नत मस्तक हो सभी सभीसे,
राम प्रेम रसपान कहूँ मैं।

राम नाम गुनगान करूँ मैं,
स्वयं का जब सम्मान करूँ मैं!

लखन की शक्ति भरत की भक्ति,
शत्रुघ्न साहस पास कहूँ मैं।
स्वयं के अंदर के रावण का,
अंत करूँ तब राम कहूँ मैं।

राम नाम गुनगान करूँ मैं,
स्वयं का जब सम्मान करूँ मैं!

लोभ मोह मद द्वेष या ईर्ष्या ,
मुक्त कहाँ ? विश्राम करूँ मैं।
जबतक तन- मन बसें हो रावण,
कैसे जय श्री राम कहूँ मैं?

राम नाम गुनगान करूँ मैं,
स्वयं का जब सम्मान करूँ मैं!

रामराज्य में सब सबके हैं,
फिर तो जय श्रीराम कहूँ मैं।
राम नाम जपना अति सुंदर,
राम ही चेतन नाम कहूँ मैं।

राम नाम गुनगान करूँ मैं,
स्वयं का जब सम्मान करूँ मैं!

स्नेहलता द्विवेदी “आर्या”

उत्क्रमित कन्या मध्य विद्यालय शरीफगंज कटिहार

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