पद्यपंकज sandeshparak,Watsalya बाल शोषण-राम किशोर पाठक

बाल शोषण-राम किशोर पाठक


Ram Kishore Pathak

लेख सुनें तैयार

अम्मा कहती प्यारी हूँ मैं।

छवि तेरी ही धारी हूँ मैं।।

फिर शाला क्यों मुझे न भेजी।

रखती घर में मुझे सहेजी।।

मुन्ना को मैं देखा करती।

पाँवों की पीड़ा भी हरती।।

सबका खाना सदा पकाती।

फिर भी मुझको डाँट लगाती।।

पढ़ूँ नहीं बस काम करूँ मैं।

बोलो शोषण इसे कहूँ मैं।।

भेद-भाव यह कैसा घर में।

दर्द नहीं होता अंतर में।।

बोलो कैसा प्रेम तुम्हारा।

बन पाती क्यों नहीं सहारा।।

पढ़ने मुझको भी जाने दो।

जीवन जरा सँवर जाने दो।।

रचयिता:- राम किशोर पाठक

प्रधान शिक्षक

प्राथमिक विद्यालय कालीगंज उत्तर टोला

बिहटा, पटना, बिहार।

संपर्क- 9835232978

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