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स्वर-माला – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

Dharmendra Kumar Thakur

Dharmendra Kumar Thakur

स्वर-माला – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

अ से अः तक की सुंदर कविता

आओ बच्चों, गाएं गाना,

स्वरों का है रूप सुहाना।

‘अ’ से ‘अः’ तक कदम बढ़ाएं,

आओ मिलकर सुर सजाएं।

ऋतु बसंत की खुशियां लाएं,

हिंदी का हम मान बढ़ाएं।

‘अ’ से मीठा अनार है होता, दाना-दाना लाल पिरोता,

‘आ’ से आम रसीला ताजा, कहलाता जो फलों का राजा।

‘इ’ से इमली खट्टी-मीठी, दादी जिसकी चटनी पीसती,

‘ई’ से ईख खेत में लहराए, जो भी खाए रस पा जाए।

आओ बच्चों, गाएं गाना…

‘उ’ से उल्लू रात को जागता, देख उजाला डरकर भागता,

‘ऊ’ से ऊन का स्वेटर प्यारा, सर्दी में बनता सहारा।

‘ऋ’ से ऋषि ध्यान में खोते, जग का सारा अज्ञान धोते।

आओ बच्चों, गाएं गाना…

स्वर की सरगम बहती जाए,

मन को सुंदर सीख सिखाए।

‘ए’ से एड़ी उठा के चलना, मंज़िल की राहों में बढ़ना,

‘ऐ’ से ऐनक आँख पे भाती, धुंधली दुनिया साफ दिखाती।

‘ओ’ से ओखली बड़ी सयानी, कूट के देती चीज़ पुरानी,

‘औ’ से औषधि / औरत जग की जननी, सेवा इसकी हमको करनी।

आओ बच्चों, गाएं गाना…

‘अं’ से अंगूर के गुच्छे न्यारे, खट्टे-मीठे प्यारे-प्यारे,

‘अः’ तो रहता खाली-खाली, बजाओ मिलकर सब अब ताली!

आओ बच्चों, गाएं गाना…

खत्म हुई अब स्वर की माला,

इसने मन में किया उजाला।

स्वर वर्णों को भूल न जाना,

सदा प्रेम से इन्हें गुनगुनाना।

   धर्मेंद्र कुमार ठाकुर 

                                   प्राथमिक विद्यालय रेही टोला 

                                          रानीगंज अररिया

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