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स्वस्थ होने का पैमाना क्या है? _ धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

Dharmendra Kumar Thakur

Dharmendra Kumar Thakur

स्वस्थ होने का पैमाना क्या है?
यहाँ हर व्यक्ति बीमार है,
दिखती हर सूरत बेज़ार है।
भीड़ तो है इंसानों की मगर,
हर शख्स खुद में एक लाचार है।
कोई तन से बीमार है, देह की बेड़ियों में जकड़ा,
कोई मन से बीमार है, इच्छाओं के जाल में पकड़ा।
हड्डियाँ दुखती हैं किसी की, कोई बिस्तर से हारा है,
पर असली मर्ज तो कुछ और है, जो दिखता न दोबारा है।
कोई मस्तिष्क से बीमार है, विचारों में ज़हर पालता,
नफ़रत, ईर्ष्या और वहम की भट्टी में खुद को ढालता।
सोच की नसें सुन्न हैं, भ्रम का छाया अंधियारा है,
बुद्धि तो है पास मगर, विवेक ने मुँह मोड़ा सारा है।
कोई कर्तव्य से बीमार है, कर्म से मुँह मोड़ खड़ा,
अपनी ही ज़िम्मेदारी की अर्थी पर जो जा पड़ा।
भूल गया है धर्म अपना, स्वार्थ का चश्मा चढ़ाए है,
औरों के हक़ को मारकर, खुद का महल बनाए है।
कोई हमें बताए ज़रा, स्वस्थ होने का क्या पैमाना है?
क्या केवल सांसों का चलना ही, जीने का अफ़साना है?
हस्पताल की पर्ची पर जो ‘नॉर्मल’ लिख कर आता है,
क्या वही रिपोर्ट इंसान को, अंदर से स्वस्थ बनाता है?
नहीं! स्वस्थ होना तो एक समरसता का नाम है,
जहाँ तन, मन और आत्मा का सुंदर संगम ललाम है।
जब मस्तिष्क में शांति हो, और कर्म में ईमानदारी हो,
जब हर कोई अपने फर्ज़ को निभाए, तभी मिटती बीमारी हो।
जब तक न जागेगा भीतर का इंसान, सब लाचार रहेंगे,
तन ठीक भी हो जाए, पर कर्म से हम बीमार रहेंगे।
आओ बदलें इस सोच को, कर्तव्य का हाथ थामें हम,
मन-मस्तिष्क को पावन कर, सच्चे स्वास्थ्य को पहचानें हम।
जब दर्द दूसरों का देखकर, आँखें हमारी नम न हों,
जब स्वार्थ की इस दौड़ में, अंदर के इंसान कम न हों,
समझो कि तब यह चेतना, गहरी किसी बीमारी में है,
इंसानियत का हर सिपाही, आज लाचारी में है।
दवाइयों के पैकेटों में, स्वास्थ्य को मत ढूंढिए,
कितने मरे जमीर यहाँ, इस बात को भी आंकिए।
जो देख पाए दर्द सबका, वह हृदय ही स्वस्थ है,
जो चल सके कर्तव्य पथ पर, वह कदम ही मस्त है।
यह रोग कोई शारीरिक, या बस दिमागी खेल नहीं,
यह आत्मा की भूख है, जिसका किसी से मेल नहीं।
जब तक न जागेगी दया, जब तक न टूटेगा अहम,
तब तक रहेगा इस जगत में, स्वस्थ होने का भरम।
तो आओ मिल कर आज हम, इस रोग की जड़ को काट दें,
कागज़ की इन रिपोर्टों से आगे, कुछ खुशियाँ बाँट दें।
तभी कहेंगे स्वस्थ हम, इस देश और समाज को,
जब कर्म और विचार से, सुर मिल सके हर साज़ को।

                                              धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
                                   प्राथमिक विद्यालय रेही टोला 
                                     रानीगंज अररिया 
                                 14.10.2026
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