Site icon पद्यपंकज

स्वतंत्रता से प्यार-रत्ना प्रिया

Ratna Priya

रत्ना प्रिया

अखिल विश्व के हर प्राणी को , स्वतंत्रता से प्यार है ,

पराधीनता में सुख नहीं , यह जानता संसार है ।

स्वतंत्र हैं हम परतंत्र नहीं , हमारा गणतंत्र सही ,

जनतंत्र है तो गणतंत्र है , स्वराष्ट्र का मंत्र यही ,

पराधीनता का जीवन तो , निरर्थक है , बेकार है ,

अखिल विश्व के हर प्राणी को , स्वतंत्रता से प्यार है ,

आसमान में उड़ते पंछी , मुक्त होकर गाते हैं ,

ऊँची उड़ान भरते हैं हवाओं से टकराते हैं ,

लाख सुविधा हो पिंजरे में बंधन से इंकार है ।

अखिल विश्व के हर प्राणी को , स्वतंत्रता से प्यार है ।

प्रताप ने परिजनों संग , घास की रोटी खाई ,

हल्दीघाटी में मुगलों को , हार की धूल चटाई ,

सुख-सुविधाओं से वंचित को , गुलामी नहीं स्वीकार है ।

अखिल विश्व के हर प्राणी को , स्वतंत्रता से प्यार है ।

स्वतंत्रता की बलिवेदी पर , लाखों ने दी कुर्बानी ,

फाँसी चढ़े , गोलियाँ खाई , लिख गए अमर कहानी ,

कष्ट , त्याग , जीवनोत्सर्ग ही वीरों के उद्रगार हैं ।

अखिल विश्व के हर प्राणी को , स्वतंत्रता से प्यार है ।

पुरुषार्थ करने वाले कभी , परिश्रम से नहीं डरते ,

मेहनती , अभ्यासी बनकर , गर्व से सदा हैं भरते ,

स्वावलंबी होना ही जीवन का सफल उपचार है ।

अखिल विश्व के हर प्राणी को स्वतंत्रता से प्यार है

अंतिम क्षण तक संघर्ष ही , जीवन की पहचान है ,

आलस्य , अपकर्ष , शिथिलता , मानवता का अपमान है ,

राष्ट्रहित में लगे न जीवन , वह जीवन बेकार है ।

अखिल विश्व के हर प्राणी को ,स्वतंत्रता से प्यार है ।

रत्ना प्रिया – शिक्षिका (11 – 12)    

उच्च माध्यमिक विद्यालय माधोपुर    

चंडी ,नालंदा

0 Likes
Spread the love
Exit mobile version