अखिल विश्व के हर प्राणी को , स्वतंत्रता से प्यार है ,
पराधीनता में सुख नहीं , यह जानता संसार है ।
स्वतंत्र हैं हम परतंत्र नहीं , हमारा गणतंत्र सही ,
जनतंत्र है तो गणतंत्र है , स्वराष्ट्र का मंत्र यही ,
पराधीनता का जीवन तो , निरर्थक है , बेकार है ,
अखिल विश्व के हर प्राणी को , स्वतंत्रता से प्यार है ,
आसमान में उड़ते पंछी , मुक्त होकर गाते हैं ,
ऊँची उड़ान भरते हैं हवाओं से टकराते हैं ,
लाख सुविधा हो पिंजरे में बंधन से इंकार है ।
अखिल विश्व के हर प्राणी को , स्वतंत्रता से प्यार है ।
प्रताप ने परिजनों संग , घास की रोटी खाई ,
हल्दीघाटी में मुगलों को , हार की धूल चटाई ,
सुख-सुविधाओं से वंचित को , गुलामी नहीं स्वीकार है ।
अखिल विश्व के हर प्राणी को , स्वतंत्रता से प्यार है ।
स्वतंत्रता की बलिवेदी पर , लाखों ने दी कुर्बानी ,
फाँसी चढ़े , गोलियाँ खाई , लिख गए अमर कहानी ,
कष्ट , त्याग , जीवनोत्सर्ग ही वीरों के उद्रगार हैं ।
अखिल विश्व के हर प्राणी को , स्वतंत्रता से प्यार है ।
पुरुषार्थ करने वाले कभी , परिश्रम से नहीं डरते ,
मेहनती , अभ्यासी बनकर , गर्व से सदा हैं भरते ,
स्वावलंबी होना ही जीवन का सफल उपचार है ।
अखिल विश्व के हर प्राणी को स्वतंत्रता से प्यार है
अंतिम क्षण तक संघर्ष ही , जीवन की पहचान है ,
आलस्य , अपकर्ष , शिथिलता , मानवता का अपमान है ,
राष्ट्रहित में लगे न जीवन , वह जीवन बेकार है ।
अखिल विश्व के हर प्राणी को ,स्वतंत्रता से प्यार है ।
रत्ना प्रिया – शिक्षिका (11 – 12)
उच्च माध्यमिक विद्यालय माधोपुर
चंडी ,नालंदा

