जब स्वार्थ से ऊपर उठकर
जिसने राष्ट्र को जीवन माना,
निज-मुक्ति से भी महान,
भारत-सेवा को पहचाना।
जीवन रहते जिसने,
मृत्यु के रहस्य को जान लिया,
करोड़ों जन-जीवन के उत्थान हेतु
तन–मन–प्राण लुटा दिया।
उस मनुज-श्रेष्ठ, आदर्श-श्रेष्ठ,
कर्तव्यनिष्ठ को करें नमन,
भारत के युगपुरुष को आओ,
हम सब मिलकर करें नमन!
भारत-भूमि के दिव्य रत्न वे,
शिव-शक्ति की अनुपम संतान,
विश्वनाथ–भुवनेश्वरी के
ज्येष्ठ पुत्र, नरेंद्र महान।
गुरु रामकृष्ण परमहंस मिले,
जिनसे आत्मतत्त्व को पहचाना,
ज्ञान-पिपासु, जिज्ञासु होकर
शोषितों का आँसू पोंछा,
नर में नारायण का दर्शन कर
दरिद्र में देवत्व माना।
भारत के उस युगपुरुष को आओ,
हम सब मिलकर करें नमन!
आर्यभूमि के सच्चे आराधक,
युगद्रष्टा, दार्शनिक, चिंतक अपार,
नवयुग–नवभारत के प्रणेता,
विचारों के ज्वलंत अवतार।
भारत को विश्वगुरु बनाने वाले,
युवाओं में अग्नि भरने वाले,
“शिक्षा है हर बुराई की जड़”
कहकर प्रश्न उठाने सिखाने वाले।
चुनौतियों से टकराने का साहस दिया,
स्वावलंबन का मंत्र पढ़ाया,
भारत के ऐसे युगपुरुष को आओ,
हम सब मिलकर करें नमन!
बाल्यकाल से संस्कारों में ढले,
दीन–दुखियों के प्रखर हितकारी,
जाति, लिंग, नारी-शोषण पर
गर्जना बनकर उठी उनकी वाणी।
पीड़ितों के दुःख पर मौन नहीं,
अन्याय से सीधा संग्राम किया,
राष्ट्रहित और मानव-कल्याण में
सर्वस्व उन्होंने न्योछावर किया।
भारत के ऐसे युगपुरुष को आओ,
हम सब मिलकर करें नमन!
परमहंस के मस्तिष्क-स्वरूप,
तपोनिष्ठ, ज्ञानपुंज विराट,
बाल-ब्रह्मचारी, विषय-विरागी,
परमात्म-प्रेम में स्थित प्रख्यात।
भारत के युवा सन्यासी वे,
गुरु-सेवा के अनुपम प्रतीक,
शिकागो धर्म महासभा में
भारत बना विश्व का केंद्र-बिंदु एक।
भौतिकता से ऊपर उठकर
आध्यात्मिक विद्या का घोष किया,
समता, सहिष्णुता, मानवता का
विश्व को अमर संदेश दिया।
भारत के ऐसे युगपुरुष को आओ,
हम सब मिलकर करें नमन!
युवाओं में हौसले भरने वाले,
आशा के दीप जलाने वाले,
“उठो,जागो,जगाओ, लक्ष्य पहचानों
का सिंहनाद कर,
नवभारत गढ़ने वाले।
आत्मशक्ति को शक्ति का स्रोत बताया,
ओजस्वी वाणी से जग को झकझोरा,
कर्मयोगी, योग-प्रवर्तक,
आध्यात्म के ध्वजवाहक, युग का उजियारा।
भारत के ऐसे युगपुरुष को आओ,
हम सब मिलकर करें नमन!
स्वरचित एवं मौलिक
मनु कुमारी विशिष्ट शिक्षिका
प्राथमिक विद्यालय दीपनगर बिचारी
राघोपुर सुपौल बिहार

