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वर्तमान में मां का नव रूप:- पुरुषोत्तम कुमार 

वर्तमान में मां का नव रूप:- पुरुषोत्तम कुमार 

 

आज भी माता का नव रूप समाज में है विद्यमान

स्त्री का आदर करने वाले सहज लेते हैं पहचान।

अपने पिता का ध्यान रखने वाली सुता है प्रथम शैलपुत्री, ध्यान रखें उसका नहीं है वो दुसरी।

पिता,पति,पुत्र, पुत्रि के लिए एक स्त्री जब ईश्वर का ध्यान लगाती है,अपने तन को भूखा रख कर उनकी भूख मिटाती है,

है तब वह माता ब्रह्मचारिणी का ही हैरूप,हे मानव कभी न भूलना उनका स्वरूप।

अपने परिवार की रक्षा हेतु कभी वह शस्त्र भी उठाती है,समाज ,परिवार सबसे वो लड़ जाती है,ऐसी माता को तुम चंद्रघंटा ही मानो,,देवी के दिव्य रूप को उनमें ही जानो।

देती है संतान को जन्म वो अनेक कष्टों को सहकर

कूष्मांडा स्वरूप ही उसका सम्मान करो,

सीमा में तुम रह कर।

अपने संतान को गोद में लिए वो सब का भार उठाती है,निज सुख का त्याग कर समाज का भला कर जाती है।ऐसी ही माता को तो स्कंद माता कहते है,जिनके नाम का स्मरण हम नवरात्र में करते हैं।

देख अन्याय को जो चुप नहीं रह पाती है,हर बंधन को तोड़ कर वो काल रात्रि बन जाती है।करती है दुष्टों का संहार वो,अपने हुंकार से सबको वो डराती है।

हाथ जोड़ हम खड़े हो जाते जब वो काली के रूप में आती है।

अनेक भार हैं उसके ऊपर

फिर भी वो मुस्काती है,

दिन रात वो मेहनत करती,

चैन कहां वो पाती है।

सबकी देखभाल करने वाली ,क्या वो माता गौरी का सम्मान पाती है।

सबके हितों की रक्षा करने वाली,हर स्त्री है माता सिद्धि दात्रि,कभी न दो कष्ट उनको,सम्मान करो उनका निशि रात्रि।

तभी वास्तव में मां की पूजा सफल होगी, मां देगी आशीर्वाद,हर कार्य सफल होगी।

 

पुरुषोत्तम कुमार 

प्रधान शिक्षक 

उर्दू प्राथमिक विद्यालय लोदीपुर गोलघर अंचल पटना।

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