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योगासन गीतिका :-कार्तिक कुमार

पद्मासन
पालथी मार, पैर जंघा पर धर,
रीढ़ सीधी, नेत्र बंद कर।
श्वास-प्रश्वास सम, मन हो शांत,
लाभ—ध्यान बढ़े, तनाव हो अंत।
वज्रासन
घुटनों के बल बैठो ध्यान से,
पीठ सीधी, हाथ जंघा के पास से।
भोजन बाद भी यह आसन सार,
लाभ—पाचन ठीक, वज्र समान बल अपार।
सुखासन
सरल बैठो सहज भाव,
पीठ सीधी, श्वास का ठहराव।
लाभ—मन स्थिर, चित्त प्रसन्न,
आरंभ योग का, सबसे अनुकूल क्षण।
सिद्धासन
एड़ी गुदा के पास टिकाओ,
दूसरा पैर ऊपर जमाओ।
लाभ—नाड़ी शुद्ध, ध्यान प्रबल,
योगियों का यह आसन सरल।
ताड़ासन
सीधे खड़े, हाथ ऊपर ले जाओ,
एड़ियाँ उठाओ, तन को तानो।
लाभ—कद बढ़े, संतुलन आए,
रीढ़ मजबूत, थकान भगाए।
तिर्यक ताड़ासन
ताड़ में झुको दाएँ-बाएँ,
कमर लचीली, अंग सुहाएँ।
लाभ—पेट की चर्बी घटे,
कमर-दर्द से राहत मिले।
कटी चक्रासन
खड़े-खड़े कमर घुमाओ,
हाथ फैलाकर पीछे देख पाओ।
लाभ—रीढ़ लचीली, पाचन ठीक,
मधुमेह में भी लाभ अनेक।
उष्ट्रासन
घुटनों पर बैठ पीछे झुको,
एड़ी पकड़, छाती खोलो।
लाभ—फेफड़े खुले, ऊर्जा बढ़े,
थायरॉइड संतुलन में चढ़े।
सर्वांगासन
पीठ के बल लेगो शरीर,
पैर ऊपर, कंधों पर भार स्थिर।
लाभ—स्मृति तेज, हार्मोन संतुलित,
“आसनों की रानी” यह प्रसिद्ध।
मंडूकासन
वज्र में बैठ मुट्ठी दबाओ,
पेट पर झुक आगे आओ।
लाभ—शुगर नियंत्रण, अग्नि तेज,
मोटापा घटे, स्वास्थ्य सहेज।
भुजंगासन
पेट के बल, हथेली नीचे,
छाती उठाओ, नाभि नीचे।
लाभ—कमर दर्द में राहत मिले,
रीढ़ मजबूत, साहस खिले।
गौमुखासन
एक हाथ ऊपर, एक पीछे,
उँगलियाँ मिलें प्रयास सच्चे।
लाभ—कंधे खुले, जोड़ सशक्त,
तन-मन दोनों रहें समर्थ।
पवनमुक्तासन
पीठ के बल घुटने मोड़ो,
छाती से लगाकर पकड़ छोड़ो।
लाभ—गैस, कब्ज से मुक्ति पाए,
पाचन सुधरे, हल्कापन आए।
शलभासन
पेट के बल, पैर उठाओ,
हाथ नीचे, शरीर सजाओ।
लाभ—रीढ़ बलवान, पीठ मजबूत,
थकान भागे, शक्ति अचूक।
श्वसन (प्राणायाम)
धीरे श्वास लो, धीरे छोड़ो,
गति समान, ध्यान मत तोड़ो।
लाभ—प्राणशक्ति का हो संचार,
चिंता घटे, जीवन हो सार।
🌼 समापन पंक्ति
आसन, श्वसन, ध्यान का संग,
स्वस्थ करे तन, निर्मल मन।
नियमित अभ्यास जो अपनाए,
योग से जीवन सफल बनाए।

कार्तिक कुमार

मध्य विद्यालय कटरमाला गोरौल वैशाली

7004318121

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