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अ से अः तक स्वर सिखाए गणेश जी से बच्चों की सीख- उमेश कुमार सिन्हा

Umesh kumar sinha

अ — से बना अगज-वदन गणेश को,

करो सदा प्रणाम।

अच्छे कर्मों से ही बच्चों,

होता जीवन महान।

आ — से बना आनंददाता गणपति,

भर दें मन में प्यार।

आहत मन को मत दुखाना,

बनना सबका यार।

इ —से बना इष्टदेव गणेश हैं,

करो हृदय से ध्यान।

ईमानदारी कभी न छोड़ो,

यही तुम्हारी शान।

ई —से बना ईश्वरस्वरूप गणपति,

ज्ञान का दें प्रकाश।

ईर्ष्या को मन में मत रखना,

प्रेम रहे हर श्वास।

उ — से बना उमा-सुत गणराज को,

करो सदा नमन।

उपकार करो जो दुख में हो,

यही श्रेष्ठ आचरण।

ऊ —से बना ऊँकारस्वरूप प्रभु,

मन में भरें उजास।

ऊँची सोच रखो जीवन में,

सच्चाई रहे पास।

**ऋ —से बना ऋद्धि-सिद्धि के दाता,

करें सभी कल्याण।

ऋणी रहो उस हर व्यक्ति के,

जिसने दिया तुम्हें ज्ञान।

ए — से बना एकदंत गणपति,

दूर करें हर विघ्न।

एक होकर साथ चलोगे,

तो आसान होगा जीवन का यात्रा।

ऐ — से बना ऐश्वर्यदाता गणराज,

दें सद्बुद्धि अपार।

ऐसा काम करो बच्चों,

जिससे बढ़े परिवार का मान।

ओ — से बना ओंकार स्वरूप प्रभु,

मंगल करें विधान।

ओछे शब्दों से बचना बच्चों,

मीठी हो हर जुबान।

औ — से बना औदार्य-भरे गणेश,

करुणा रखें अपार।

औरों के आँसू पोंछ सको तो,

जीवन होगा साकार।

अं — अंग-अंग में बसें गणेश,

हृदय रहे निर्मल।

अंतर से जो अच्छा होगा,

जीवन होगा सफल।

अः — अः से अहा अंत नहीं,

गणपति की महिमा अनंत।

अच्छे बच्चे वही कहलाएँ,

जिनका मन हो संत।

ऐसे है हिंदी के स्वर

सभी के भाव रखने को 

रहते सदा तत्पर

  हिंदी हमारी अरमान है

बच्चों को अच्छी सीख की संस्कार भरी पहचान है 

 गणपति बप्पा मोरया!

सत्य, प्रेम और सदाचार—

यही बच्चों का सच्चा श्रृंगार।

स्वरचित ,रचनाकार:-

उमेश कुमार सिन्हा 

डिसेंट एकेडमी वाया स्कूल 

तुलसीपथ लालापुल रघुनाथपुर

अंचल – ब्रह्मपुर, जिला – बक्सर

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