Site icon पद्यपंकज

कृष्ण

कृष्ण… तुम आज भी कहाँ हो?
जब-जब मनुष्य के भीतर
मनुष्य मरने लगता है,
जब रिश्तों की भीड़ में
कोई अपना खोने लगता है,
जब सत्य अकेला खड़ा होकर
झूठ से लड़ता है—
तब मन पूछता है,
कृष्ण… तुम आज भी कहाँ हो?
तुम थे तो
मुरली की तान में प्रेम था,
यमुना की लहरों में गीत था,
गोकुल की गलियों में
हर चेहरे पर मुस्कान थी।
पर राधा के नयनों में
जो विरह तुम छोड़ गए,
उसका उत्तर आज तक
किसी गीत में नहीं मिला।
तुमने माखन चुराया,
दिल चुराए,
फिर एक दिन
सबको छोड़कर चले गए।
माँ यशोदा की आँखों में
शायद उस दिन भी प्रश्न था—
“कन्हैया, लौटोगे कब?”
तुम द्वारका के राजा बने,
पर भीतर का ग्वाला
कभी मर नहीं पाया।
मोरपंख सिर पर रहा,
पर मन में जाने कितने
काँटों का वन उग आया।
कुरुक्षेत्र में तुमने
अर्जुन को गीता सुनाई,
कर्तव्य का मार्ग दिखाया,
पर क्या तुम्हारे अपने हृदय ने
कभी तुमसे पूछा नहीं—
“कृष्ण, अपने प्रियजनों के विरुद्ध
यह युद्ध कैसे लड़ोगे?”
तुमने कहा—
कर्म करो, फल की चिंता मत करो।
पर हे माधव,
जिसने सबका भार उठाया,
क्या उसने कभी
अपना दर्द किसी से कहा?
सुदामा आया तो
तुम राजा होकर भी
दो कदम नहीं—
पूरा हृदय दौड़ पड़े।
दो मुट्ठी चावल में
तुमने मित्रता का
पूरा संसार पढ़ लिया।
और जब तुम्हारी बारी आई,
जब जीवन ने
तुम्हें भी अकेला किया,
तब न रथ था,
न शंख था,
न सुदर्शन की गर्जना—
बस एक वन था,
एक वृक्ष था,
और एक शिकारी का तीर…
सोचता हूँ कृष्ण,
जिसने संसार को जीना सिखाया,
उसके हिस्से में
इतना अकेलापन क्यों आया?
शायद इसलिए कि
ईश्वर भी मनुष्य को यह समझाना चाहता था—
महान होना आसान नहीं,
प्रेम करना आसान नहीं,
और सत्य के साथ चलना
कभी आसान नहीं होता।
आज भी जब
आँखों से चुपचाप आँसू गिरते हैं,
जब कोई अपना
बिना कहे दूर चला जाता है,
जब जीवन का अर्थ
समझ नहीं आता—
तब भीतर से एक आवाज़ आती है—
“डरो मत…
मैं तुम्हारे साथ हूँ।”
और उस क्षण लगता है—
कृष्ण कहीं गए ही नहीं।
वह बाँसुरी की धुन में हैं,
माँ की ममता में हैं,
मित्र की सच्चाई में हैं,
प्रेमी की प्रतीक्षा में हैं,
योद्धा के साहस में हैं,
और उस आँसू में भी हैं
जो गिरने से पहले
किसी कृष्ण को पुकारता है।
हे कृष्ण,
तुम मंदिरों में मिलो या न मिलो,
बस इतना करना—
जब मनुष्य टूटने लगे,
उसके भीतर
एक छोटी-सी गीता जगा देना

Gauri shankar singh

ums chaksingar राघोपुर वैशाली

0 Likes

Gauri shankar Singh

Spread the love
Exit mobile version