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छोटी हूँ, प्यारी हूँ – प्रभात चंद्र विद्यासागर

छोटी हूँ, प्यारी हूँ – प्रभात चंद्र विद्यासागर

छोटी हूँ, प्यारी हूँ,
मम्मी की दुलारी हूँ।
पापा की राजकुमारी हूँ,
भैया की जान न्यारी हूँ।

दीदी की मैं लाडली,
सबसे लगती प्यारी हूँ।
हँसती हूँ, मुस्काती हूँ,
सबके मन को भाती हूँ।

नन्हे-नन्हे पाँव मेरे,
मीठी-मीठी बोली है।
मेरी प्यारी हँसी में छुपी,
खुशियों की रंगोली है।

आओ मेरे संग खेलो,
मिलकर हँसें और गाएँ।
नाचें-कूदें, धूम मचाएँ,
खुशियों के दीप जलाएँ।

मम्मी मेरी प्यारी हैं,
पापा सबसे न्यारे हैं।
भैया-दीदी के प्यार से,
जीवन के दिन प्यारे हैं।

छोटी हूँ, नादान हूँ,
सबकी प्यारी जान हूँ।
घर-आँगन की रौनक हूँ,
मैं खुशियों की मुस्कान हूँ!

रचनाकार :- प्रभात चंद्र विद्यासागर (प्रधान शिक्षक) राजकीय प्राथमिक विद्यालय, औरैया, आदापुर, पूर्वी चंपारण ( बिहार)

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