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देश का भविष्य: नन्हें मुन्ने-धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

Dharmendra Kumar Thakur

Dharmendra Kumar Thakur

ये बात है उन नन्हें मन्नों की,
मासूम सी भोली आँखों की।
खेल ही जिनकी दुनिया है,
ना फिक्र इन्हें बहारों की।
उनके लिए तो दिन है न रात है,
बस खुशियों की ही बारात है।
घड़ी की सुई से बेगाने,
हर पल में छिपी सौगात है।
नहीं किसी से दोस्ती, नहीं किसी से दुश्मनी,
इनकी दुनिया है बिलकुल अनमनी।
न कोई बैर, न कोई मलाल,
हर चेहरा यहाँ है बेमिसाल।
पल में रूठे, पल में माने,
ये तो बस अपनी ही धुन जाने।
आपस में लड़कर भी देखो,
फिर दोस्ती की बात बनी, फिर हँसने के बहाने।
न जाने किस पावन देश से आए हैं,
ये अद्भुत से संस्कार साथ लाए हैं।
निर्मल मन और सच्ची मुस्कान,
बना देते हैं हर मुश्किल आसान।
ये कोपले हैं नए सवेरे की,
ये रौशनी हैं हर अँधेरे की।
ये महकते फूल हैं चमन के,
ये रक्षक हैं अपने वतन के।
आज भले ही हैं ये छोटे और नादान,
पर छू लेंगे एक दिन ऊँचा आसमान।
इन्हीं के हाथों में कल की कमान है,
ये नन्हें बच्चे ही हमारे देश की शान हैं,
यही तो हमारे कल का भविष्य महान हैं।

धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
प्राथमिक विद्यालय रेही टोला
रानीगंज अररिया

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