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हलाहल बनती शक्ति”- उमेश कुमार सिन्हा ” निर्देशक”

शीर्षक :-“हलाहल बनती शक्ति”- उमेश कुमार सिन्हा ” निर्देशक”

 

सत्य पर पर्दा न डालो,

सत्य ही ईश्वर है, यह मानो।

 

शक्ति को हलाहल मत बनने दो,

असहाय, अबला, निःसहाय पर

इस हलाहल का दुरुपयोग न करो।

 

जो व्यक्त करना हो उचित अवसर पर,

उसे जबरन भीतर न निगलो।

इंसान हो तुम, इंसानियत पहचानो,

जज़्बात निगलकर अजगर मत बनो।

 

स्त्री की गरिमा, पुरुष का सम्मान,

दोनों का सुरक्षित रहे स्वाभिमान।

धर्म और नीति पर अपने अरमान रखो,

सत्य और न्याय का सदा सम्मान रखो।

 

अवसर जिन्हें मिलता है आगे बढ़ने का,

वे स्वयं को सर्वशक्तिमान न समझें।

समय बदलता है, यह सदा याद रखें,

किसी निर्बल को कभी तुच्छ न समझें।

 

गर्त में पड़ने पर कोई तुच्छ जीव भी,

संकट में सहारा बन सकता है।

जो आज स्वयं को शक्तिशाली समझे,

कल वही सहायता माँग सकता है।

 

बातों के शीतयुद्ध से लक्ष्य नहीं मिलता,

केवल संवाद से हर प्रश्न नहीं सुलझता।

पौरुष वही, जो मर्यादा की राह चले,

हर आत्मा का सम्मान करे, स्वाभिमान से जिए।

 

अभिमान त्यागो, मानवता को पहचानो,

हर आत्मा में परमात्मा का रूप जानो।

शक्ति का अर्थ किसी को दबाना नहीं,

मानवता से बढ़कर कोई ठिकाना नहीं।

 

स्वरचित रचनाकार:- 

 

उमेश कुमार सिन्हा निर्देशक 

डिसेंट एकेडमी वाया स्कूल रघुनाथपुर 

बिहार सरकार द्वारा पूर्णतः स्वीकृत विद्यालय 

तुलसीपथ लालापुल रघुनाथपुर 

अंचल – ब्रह्मपुर, जिला – बक्सर

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