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शीर्षक :- ज्ञान के आँगन में भेद कैसा? -उमेश कुमार सिन्हा ‘निर्देशक ‘
किसने खींची लकीर यहाँ, किसने बाँटे आँगन हैं?
ज्ञान बाँटने वालों के मन में क्यों इतने विभाजन हैं?
कहीं इमारत छोटी-बड़ी है, कहीं साधन का विस्तार,
पर अक्षर की कीमत एक है, एक कलम की धार।
किसी ने श्रम से दीप जलाया, किसी ने साधन पाए,
दोनों ने ही अपने दम पर कितने जीवन बनाए।
न भवन से विद्या बढ़ती है, न नाम से मान मिलता,
सच्चे शिक्षक के प्रयासों से ही भविष्य निखरता।
किसी की वर्दी अलग सही, किसी का पहनावा,
बच्चों के सपनों पर आखिर किसका है एकाधिकार भला?
किसी की थाली में सम्मान, किसी को तिरस्कार क्यों?
एक ही पेशे के लोगों में इतना अहंकार क्यों?
जो ज्ञान का उपदेश दे रहे, वे इतना तो जानें,
सम्मान बाँटने से बढ़ता है, यह बात सभी मानें।
न कोई छोटा ज्ञान यहाँ है, न कोई बड़ा उजाला,
हर शिक्षण-संस्थान ने अपने ढंग से भविष्य सँभाला।
किसी की उपलब्धि पर गर्व करो, किसी को कम मत आँको,
दूसरों के श्रम की गरिमा को भी अपने मन में आँको।
मंदिर अलग-अलग हो सकते, आराध्य नहीं बदलते,
रास्ते चाहे भिन्न रहें, मंजिल के अर्थ नहीं बदलते।
शिक्षा का आँगन सबका है, सबका इसमें योगदान,
एक-दूसरे को नीचा दिखाना कैसा शिक्षक का सम्मान?
याद रहे, पहचान हमारी संस्थानों से नहीं बनती,
कलम की सच्चाई कभी नामों की मोहताज नहीं रहती।
जो बच्चों में भेद मिटाए, वही गुरु कहलाने योग्य,
शिक्षा के इस पावन कर्म में सबका योगदान अमूल्य।
निजी हो या सरकारी, दोनों का एक ही ध्येय,
बच्चों के जीवन में भरना ज्ञान, विवेक और श्रेय।
दीवारों का भेद भुलाकर एक नया संदेश दें,
हम शिक्षक हैं, शिक्षक बनकर सबको समान परिवेश दें
उमेश कुमार सिन्हा
डिसेंट एकेडमी वाया स्कूल रघुनाथपुर
बिहार सरकार द्वारा पूर्णतः स्वीकृत विद्यालय
गोस्वामी तुलसीदास पथ लालापुल रघुनाथपुर
अंचल- ब्रह्मपुर ,
जिला – बक्सर

