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हाफ सैटरडे-रामपाल प्रसाद सिंह अनजान

RAMPAL SINGH ANJAN

RAMPAL SINGH ANJAN

दुख की खाई भर गई,

 सुख स्वागत का भोर।

बंध गई है आज वह,

थी टूटी जो डोर।।

थी टूटी जो डोर,

बड़ा नुकसान किया है।

क्या शिक्षक क्या शिष्य,

बुरा परिणाम दिया है।।

कहते कवि “अनजान”, 

कहानी फिर दोहराई।

पढ़कर निर्गत पत्र,

भरी है दुख की खाई।।

रामपाल प्रसाद सिंह अनजान

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