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हृदय की पुकार- कुमारी प्रियंका वर्मा

Ptiyanka Kumari Verma

Ptiyanka Kumari Verma

हां समझो मुझको इसके पहले कि

भाव शून्य ना बन जाऊ,,

नित जीवन के संघर्षों से ,

हां अंतर्मन के द्वंद्वों से,,

उन अपनों के ठुकराने से,

पीड़ा में भी मुस्काने से,,

इससे पहले अति बनू कठोर,

तेरे वचनों को ठुकराऊ,,,,

हां समझो मुझको इसके पहले कि

भाव शून्य ना बन जाऊ,,

कहां कमी रही मेरे व्रत में

मुस्काती थी आहत में,,

है सुख को मैने त्यागे सब ,

निज सपनों को भी वार दिया

तुझ तक़ पहुंचे मेरी बाते

इसलिए कलम है थाम लिया

कटु वचनों को, हा सुन सुन के

कही भाव शून्य ना बन जाऊ

हां समझो मुझको इसके पहले कि

भाव शून्य ना बन जाऊ,,

छोड़ो जग की बातें सारी

तुम तो मेरे अपने थे,,,,

सब स्वपन सलोने भी फीके

जब अंतर्द्वंद्व चले मन में,

इसके पहले तज दु सबकों

इसके पहले बंधन तोड़ूं

इससे पहले जग को छोड़ू

हां समझो मुझको इसके पहले कि

भाव शून्य ना बन जाऊ

कुमारी प्रियंका वर्मा

प्रधान शिक्षिका

प्राथमिक विद्यालय भूसहुला

डिहरी (रोहतास)

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