ज़िंदगी अगर दे चुनौती,
सहर्ष इसे स्वीकार कर।
ना कभी तू बैठ यूँ ही ज़िंदगी से हारकर,
ज़िंदगी अगर दे चुनौती, सहर्ष इसे स्वीकार कर।
न मानी हार जिसने मुश्किलों से हारकर,
विश्व विजयी बन गया वह बाज़ियों को मारकर।
ज़िंदगी अगर दे चुनौती, सहर्ष इसे स्वीकार कर।
कोई मंज़िल है नहीं, जो आए तेरे द्वार पर,
तू पथिक बन चलता जा, मंज़िलों से प्यार कर।
ज़िंदगी अगर दे चुनौती, सहर्ष इसे स्वीकार कर।
तेरी नींदों में भी सपने मंज़िलों के आएँगे,
तू खुद को आत्मसात कर, तू मंज़िलों से प्यार कर।
ज़िंदगी अगर दे चुनौती, सहर्ष इसे स्वीकार कर।
हारकर भी जीत गया जो,
वो कहलाया है बाज़ीगर।
ज़िंदगी अगर दे चुनौती,
सहर्ष इसे स्वीकार कर।
कुमारी प्रियंका वर्मा
प्रधान शिक्षिका
प्राथमिक विद्यालय भूसौला
प्रखंड डेहरी, रोहतास

