यह शब्दों का वैभव नहीं, संस्कृति का अभिमान है,
पद्यपंकज की साधना, साहित्य का जयगान है।
अमितेश की वाणी में स्वर, कनिष्का के सुर में साज,
शिवेंद्र की गरिमा से शोभित, अनुपमा की नई परवाज़।
डॉ. चंदन श्रीवास्तव का चिंतन, ज्ञान-ज्योति का धाम,
शिव कुमार का मार्गदर्शन, बढ़ाए मंच का नाम।
राम किशोर पाठक के आशीष, चंद्रकांत का प्रकाश,
अंबर और स्वराक्षी से सजता, सृजन-सुधा का आकाश।
ये नाम नहीं, साहित्य-साधना के उज्ज्वल प्रतिमान हैं,
इनके श्रम से पद्यपंकज के अक्षर-अक्षर महान हैं।
कलम बने हुंकार यहाँ, शब्द बनें तलवार,
ज्ञान, सृजन, संस्कार से गूँजे हिंदी का संसार।
नमन संपादक मंडल को, नमन सृजन के मान को,
पद्यपंकज समर्पित रहे, हिंदी के उत्थान को!
जब तक शब्दों में तेज रहेगा, जब तक हिंदी की शान,
तब तक अमर रहेगा साहित्य, अमर रहेगा पद्यपंकज का नाम!
स्वरचित रचनाकार:-
उमेश कुमार सिन्हा “निर्देशक “
डिसेंट एकेडमी वाया स्कूल रघुनाथपुर
बिहार सरकार द्वारा पूर्णतः स्वीकृत विद्यालय
तुलसी पथ लालापुल रघुनाथपुर
अंचल- ब्रह्मपुर
ज़िला – बक्सर

