मैं वही शब्द का शिल्पकार हूँ।
काव्य में भाव का चित्रकार हूँ।।
छंद कविता बनी खास संगिनी।
हर रही चित वही रास रंगिनी।।
रूप कवि का धरा गीतकार हूँ।
काव्य में भाव का चित्रकार हूँ।।०१।।
लोग तो मस्त है देखकर जिसे।
प्रेमिका है वही मैं कहूँ किसे।।
प्रेम नव गढ़ रहा काश्तकार हूँ।
काव्य में भाव का चित्रकार हूँ।।०२।।
रूठ वनिता रही नित्य ही जहाँ।
लेखनी छोड़ती संग भी कहाँ।।
युग सृजन को लिए आशकार हूँ।
काव्य में भाव का चित्रकार हूँ।।०३।।
गीतकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
सियारामपुर, पालीगंज, पटना, बिहार।
संपर्क – ९८३५२३२९७८
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