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कुछ ही दिन का साथी – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’

RAMPAL SINGH ANJAN

RAMPAL SINGH ANJAN

कुछ ही दिन का साथी – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’

 

मैं रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’

अकेला होकर सत्य को

निवेदित कर रहा हूॅं आपको शांति मिले

और परिवार को भी🙏🙏🙏🙏


भाग्य में क्या-क्या लिखा है,

कौन है जो जानता?

छोड़ देगा तन हमारा,

मन कभी क्या मानता?

 

हो गया है कुछ यही सब,

थे कभी जो अब नहीं,

दे रहे श्रद्धांजलि हम,

शांति से रहिए कहीं।

✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️

रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’

सेवानिवृत शिक्षक 

मध्य विद्यालय दरबेभदौर

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