लोग माता -पिता को अपने घर में दुत्कार रहे ,
खरीद कर लाए शौक से कुत्ते पाल रहे।
माता- पिता को समय पर नही देते खाना,
कुत्ते को अच्छा खाना मिलता रोजाना।
माता -पिता को टूटे घर में बिछावन,
कुत्ते को सोफ़ा पर रोज पावन।
माता -पिता बिछावन पर रहे बीमार,
कुत्ते के लिए एक से एक उपचार।
माता- पिता को भूखे पर देता बात लात,
कुत्ते को माँस पर माँस दूध भात।
माता- पिता को रखता घर में बंद,
कुत्ते को रोज घुमाने का प्रबंध।
कुत्ते को रोज कराता स्नान,
माता -पिता पर कभी न देता ध्यान।
कुत्ते को पहनाता नया साफ कपड़ा,
माता- पिता का कपड़ा गंदा चिथड़ा।
कुत्ते को रोज सुबह शाम चाय बिस्कुट,
माता- पिता को गर्म पानी भी न मिलता दो घूँट।
कुत्ते को घुमाने के लिए मोटरकार,
माता- पिता घर का खड़ा दीवार।
ऐसा कभी न करना भैया पाप,
जो माता- पिता का मिले तुझे श्राप।
सुबह उठ माता- पिता को करो प्रणाम,
सदा खुश रहेंगे सभी भगवान।
नीतू रानी, विशिष्ट शिक्षिका, स्वरचित माता पिता पर कविता।
स्कूल – म०वि०रहमत नगर सदर मुख्यालय पूर्णियाँ बिहार।

