मेरे बच्चे भविष्य की शान बनेंगे
मेरे नन्हे-नन्हे फूल एक दिन, देश का नाम करेंगे,
ज्ञान, कर्म और संस्कारों से, जग में ऊँचा स्थान धरेंगे।
आँखों में सपने उज्ज्वल होंगे, हृदय में होगा स्वाभिमान,
मेरे बच्चे भविष्य की शान बनेंगे, भारत की पहचान बनेंगे।
नन्हे कदमों से चलकर ये, मंजिल को पा जाएँगे,
मेहनत की कलम से बच्चे, नई इबारत लिख जाएँगे।
अंधकार के घने कुहासे में, दीपक बनकर जलेंगे,
मेरे बच्चे भविष्य की शान बनेंगे, देश का गौरव बढ़ाएँगे।
कोई बनेगा वीर सिपाही, कोई वैज्ञानिक कहलाएगा,
कोई शिक्षक बनकर जग में, ज्ञान की अलख जगाएगा।
कोई डॉक्टर बनकर मानवता के घावों को भर जाएगा,
कोई किसान बन धरती पर, खुशियों की फसल उगाएगा।
जाति-धर्म की दीवारों से, ऊपर उठकर जीना सीखेंगे,
प्रेम, दया और सेवा के, सुंदर मोती चुनना सीखेंगे।
नारी का सम्मान करेंगे, हर निर्बल का साथ निभाएँगे,
सत्य और सद्भाव के पथ पर चलकर, सुंदर विश्व बनाएँगे।
इनकी हँसी में खुशियाँ होंगी, इनके मन में प्यार रहेगा,
इनके उज्ज्वल कर्मों से ही, भारत का संसार सजेगा।
कल के सूरज, कल के तारे, नई सुबह लेकर आएँगे,
मेरे बच्चे अपने श्रम से, इतिहास नया रच जाएँगे।
नन्हे हाथों में है ताकत, नन्ही आँखों में अरमान,
इनके सपनों में बसता है, भारत का स्वर्णिम अभियान।
आज भले ही छोटे हैं ये, कल ऊँची उड़ान भरेंगे,
अपने माता-पिता और गुरु का, हर सपना साकार करेंगे।
आओ मिलकर इन्हें सँवारें, प्रेम से इनका मान बढ़ाएँ,
शिक्षा, संस्कार और सद्बुद्धि से, जीवन-पथ उज्ज्वल बनाएँ।
इनके भीतर छिपी प्रतिभा को, मिलकर हम पहचानेंगे,
*मेरे बच्चे भविष्य की शान बनेंगे, हम सबका अभिमान बनेंगे!
*कवयित्री : पुनम कुमारी
उच्च माध्यमिक विद्यालय, करजा
*प्रखंड : शाहपुर | जिला : भोजपुर, बिहार

