नवदुर्गा की महिमा -उमेश कुमार सिन्हा
आओ माँ का व्रत करे हम
उनके सम्मान में उपवास करे हम
जो भी श्रद्धा से जुट जाए
मां को प्रसाद अर्पित करे हम
नौ दिनों तक नौ रूपों में, माँ की महिमा गाते हैं,
श्रद्धा के पावन दीप जलाकर, शीश चरणों में झुकाते हैं।
प्रथम दिवस माँ शैलपुत्री, पर्वतराज की प्यारी हैं,
धैर्य, साहस और संकल्पों की, अनुपम शक्ति न्यारी हैं।
द्वितीय दिवस ब्रह्मचारिणी, तप-साधना की पहचान,
संयम, निष्ठा और त्याग से, देती हैं जीवन को मान।
तृतीय दिवस माँ चंद्रघंटा, शौर्य-शक्ति का रूप,
दुष्टों के संहार हेतु, धारण करती दिव्य स्वरूप।
चतुर्थ दिवस माँ कूष्मांडा, सृष्टि-सृजन की आधार,
उनकी दिव्य मुस्कान से, आलोकित हुआ संसार।
पंचम दिवस स्कंदमाता, वात्सल्य की प्रतिमूर्ति,
ममता की शीतल छाया से, करतीं जीवन की पूर्ति।
षष्ठम दिवस माँ कात्यायनी, रणचंडी अवतार,
धर्म-संरक्षण हेतु करतीं, दुष्टों पर प्रहार।
सप्तम दिवस कालरात्रि, भय और तम की नाशक,
दुष्टों के अभिमान मिटाकर, भक्तों की सुखदायक।
अष्टम दिवस महागौरी, पवित्रता की पहचान,
शांति, करुणा और उज्ज्वलता से, देतीं शुभ वरदान।
नवम दिवस माँ सिद्धिदात्री, सिद्धियों की दात्री,
भक्तों के कल्याण हेतु, जग की मंगलकारी।
नौ रूपों में एक ही शक्ति, महिमा अपरंपार,
माँ दुर्गा के चरणों में है, श्रद्धा का संसार।
अधर्म मिटे, सद्बुद्धि जागे, प्रेम बने आधार,
बहन – बेटियों को सम्मान दें, जरूरतमंदों की सहायता करें, अन्याय का विरोध करें और प्रेम, सद्भाव तथा मानवता को अपना धर्म बनाएँ।
माँ की कृपा से सुखमय हो, अपना देश महान!
स्वरचित रचनाकार:-
उमेश कुमार सिन्हा निर्देशक
डिसेंट एकेडमी वाया स्कूल
तुलसी पथ लालापुल रघुनाथपुर
अंचल – ब्रह्मपुर जिला – बक्सर

