सर्व श्रेष्ठ वह भक्ति लहेगा।
नित्य राष्ट्र-हित रक्त बहेगा।
शौर्य बोध अब गौन नहीं हो।
वीर-धीर तुम मौन नहीं हो।।
शत्रु शोध पर, कौन? नहीं हो।
राष्ट्र-भक्ति कद बौन नहीं हो।।
प्राण हान कर शीश ढहेगा।
नित्य राष्ट्र-हित रक्त बहेगा।।०१।।
मातृभूमि पर जान लुटाएँ।
भेद-भाव सब शीघ्र भुलाएँ।।
नींद त्याग कर शस्त्र उठाएँ।
देश-द्रोह जड़ मूल मिटाएँ।।
घात-घात प्रतिघात कहेगा।
नित्य राष्ट्र-हित रक्त बहेगा।।०२।।
प्रेम-भाव पथ दिव्य हमारा।
दीन-हीन सह सौम्य सहारा।।
देवलोक तक छोड़ किनारा।
देश-प्रेम हिय आज पुकारा।।
दुष्ट-दृष्टि भय-मुक्त रहेगा?
नित्य राष्ट्र-हित रक्त बहेगा।।०३।।
गीतकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
सियारामपुर, पालीगंज, पटना, बिहार।
संपर्क- ९८३५२३२९७८
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