पद्यपंकज Bhakti,Prem,Veer जय अमर जवान-अश्मजा प्रियदर्शिनी

जय अमर जवान-अश्मजा प्रियदर्शिनी


Ashmaja

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जय अमर जवान

शहिदों तुम्हे नमन, मिशाल हैं तेरा समर्पण।
स्नेह, करूणा, भक्ति की श्रद्धांजलि तुझे अर्पण।
देश-भक्ति में समर्पित अर्पित करते जो प्राण,
जिनसे गौरवान्वित होते ये जमीं आसमान।
सरहद पर लड़ते मर मिटते राष्ट्र निशान।
राष्ट्र के कर्मवीर जय हो हे अमर जवान।।
आतंकवाद की डगर पर बना है श्मशान।
मेघों से गरजते बंदूक तोप के युद्ध घमासान।
रक्त से लिखी गाथा जिसने वो बना महान।
इतिहास के स्वर्णाक्षरों में पाया उसने सम्मान।
जिसकी कुर्बानी के होते दिव्य अनुपम अनुष्ठान।
राष्ट्र के कर्मवीर जय हो हे अमर जवान।।
अतुलित अदम्य शाहस जय हो हे शत्रु निशान।
जिससे अलौकिक रहे देश हमारा हिन्दुस्तान।
न झुकने दिया तिरंगा दे दी अपनी जान।
प्राणों को न्योछावर कर बचाया भारत की शान।
नन्हे सुतो को हर्षाते तेरे पराक्रम के ज्ञान।
राष्ट्र के कर्मवीर जय हो हे अमर जवान।।
तुझपर देशवासियों का अश्रु-सुमन है कुर्बान।
अमर शहिदों से गौरवान्वित सारा जहान।
देश-भक्ति से पल्लवित-पुष्पित हो हर नव -विहान।
अश्रु-संवेदना के करूणा प्लावित ह्रदय से है आह्वान,
हमारी भी हो दिव्य श्रद्धांजलि अर्पित हमारे भी प्राण।
जय हो हे अमर शहीद जय हो हे अमर जवान।।

अश्मजा प्रियदर्शिनी
मध्य विद्यालय डुमरी, फतुहा, पटना

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