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पथ और प्रत्याशा – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

Dharmendra Kumar Thakur

Dharmendra Kumar Thakur

पथ और प्रत्याशा – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

आयु बीत रही है निरंतर, पर जीवन की यात्रा अभी शेष है,
जो टूटकर बिखरा था पहले, उसका प्रभाव अभी शेष है।
लोग सुनाते हैं सदा, मेरी पराजय के अनेक प्रसंग,
उन्हें मेरी सफलता का समाचार, मिलना अभी शेष है।
समय आज मौन है तो क्या हुआ, मन में तनिक भी निराशा नहीं,
मेरे भाग्य का नया सूर्योदय, और नया सवेरा होना अभी शेष है।
शारीरिक रूप से थक चुका हूँ, इन परिस्थितियों से निरंतर संघर्ष करते-करते,
परंतु स्वयं से पराजय स्वीकार करना, अभी भी शेष है।
सबको प्रतीत होता है कि, इस जीवन की कथा समाप्त हो गई,
परंतु मेरे जीवन का सबसे सुंदर अध्याय, प्रारंभ होना अभी शेष है!

यह अंत नहीं, एक भव्य और नव निर्माण की सुंदर बेला है,
जिसने अकेले चलना सीखा, उसने ही इतिहास बदला अकेला है।
अब उठकर खड़ा होना है, और एक नया कीर्तिमान स्थापित करना है,
भाग्य की इन रेखाओं को बदलकर, अपनी सफलता से स्वयं को भरना है।

धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
प्राथमिक विद्यालय रेही टोला
रानीगंज अररिया

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