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पावस आया-ब्यूटी कुमारी

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अंबर में जलधर,
अवनी पर पावस आया।
बह रहा शीतल समीर,
कॉप रही है काया।
पयोधर की गर्जना,
दामिनी का दमक,
मार्तंड सा दीप्तिमान।
धरा पर झर रहा जलबिंदु,
चहुंओर पानी – पानी।
पावस आया पावस आया,
अवनी का प्यास बुझाया।
कृषक को हर्षाया,
धरा पर हरियाली छाया।
दादुर का टर्र- टर्र,
कर्ण में गुंजायमान।
गगन में देख बदरिया,
छम -छम नाचे मोर।
सरिता सर निर्मल जलधार,
वसुंधरा पर जीवन का आधार।
सबके मन को हर्षाया,
भूतल पर पावस आया।

ब्यूटी कुमारी
प्रधान शिक्षक
दलसिंहसराय
समस्तीपुर

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