पावस है आया अभी-अभी।
है मन हर्षाया अभी-अभी।।
बादल बाशिंदे यहाँ-वहाँ।
हैं गिरते बूँदे यहाँ-वहाँ।।
है सरि मुस्काई यहाँ-वहाँ।
है खुशियाँ छाई यहाँ-वहाँ।।
हर्ष मही छाया अभी-अभी।
पावस है आया अभी-अभी।।०१।।
आतप है भागा जहाँ-तहाँ।
शैशव है जागा जहाँ-तहाँ।।
है चहका कागा जहाँ-तहाँ।
पाहुन का धागा जहाँ-तहाँ।।
मुग्ध हुई काया अभी-अभी।
पावस है आया अभी-अभी।।०२।।
बूँद धरा को तृप्ति वारती।
गंध धरा की वायु धारती।।
वृक्ष लता दे भाव आरती।
झूम रही है सौम्य भारती।।
प्रेमिल सी माया अभी-अभी।
पावस है आया अभी-अभी।।०३।।
गीतकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
सियारामपुर, पालीगंज, पटना, बिहार।
संपर्क- ९८३५२३२९७८

