प्रकृति की रक्षा (सच्ची साधना) – रिंजु कुमारी
प्रकृति ही मेरा ईश्वर, अल्लाह, मेरा संसार है,
इसके कण-कण में बसता, मेरा पालनहार है।
क्यों मूर्ति बनाकर पूजूँ, जब प्रकृति ही आधार है,
इसकी हरियाली में बसता, मेरा सारा संसार है।
कर्म ही मेरी पूजा है, कर्म ही मेरा धर्म,
सेवा से बढ़कर क्या होगा, कोई दूजा कर्म?
माँ-बाप मेरे भगवान हैं, उनकी सेवा आराधना,
प्रकृति की रक्षा, मानवता की सेवा—यही है सच्ची साधना। 🙏
रिंजु कुमारी,
प्राथमिक विद्यालय पासवान टोला कीर्किचिया,
फॉर्बेसगंज अररिया
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