प्यारे शिक्षक – मुन्नी कुमारी
शिक्षक प्यारे लगते हैं,
जग से निराले होते हैं।
चलना हमें सिखाते हैं,
सही राह दिखाते हैं।
अंधकार सब दूर भगाते,
ज्ञान की ज्योति हैं जलाते।
हर बच्चे को आगे बढ़ाते,
अच्छा इंसान बनाते हैं।
हर रूप में ढल जाते हैं,
कभी माँ तो कभी पिता बन,
सब काम आसान करते हैं।
बच्चों के छोटे-छोटे सपनों को
अपने दिल में जगह देते हैं।
खुद जलकर भी हर पल शिक्षक,
बच्चों का भविष्य सँवारते
हैं।
अक्षर-अक्षर ज्ञान बाँटकर,
ऊँचाइयों पर चढ़ाते हैं।
करो शिक्षक का सम्मान,
जग में हो इनका नाम।
पूरा हो हम सबका अरमान,
यही है मानवता की पहचान।
रचयिता — मुन्नी कुमारी
प्रधान शिक्षिका
प्राथमिक विद्यालय मोहनपुर मुशहरी
प्रखण्ड — झंझारपुर, मधुबनी
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