उड़ान सपनों के – सुबाला कुमारी

उड़ान सपनों के – सुबाला कुमारी

मेरे प्यारे बच्चों, आज कुछ नया सीखते हैं,
धमा-चौकड़ी की बातों से हटकर
नवाचारी शिक्षा का इतिहास रचते हैं।
हम सब कुछ कदम साथ-साथ चलते हैं।

कुछ अनबूझ पहेली, कुछ चुटकुले
और कुछ रोचक तथ्यों को जोड़ते हैं।
कुछ ज्ञान-विज्ञान की गुप्त बातें
और कुछ हास्य-व्यंग्य की बातें बोलते हैं।
आइए अब वर्ग कक्ष की ओर बढ़ते हैं,
एक नई कहानी के साथ अध्याय को जोड़ते हैं।
कभी भीमराव अंबेडकर की जाति-प्रथा
और कभी दहेज की कुरीतियों से
भगजोगनी के अध्याय को जोड़ते हैं।

आइए अब अल्पाहार की प्रतीक्षा करते हैं,
रंग-बिरंगे व्यंजनों से रसपान करते हैं।
खेल की घंटी का भी अब इंतज़ार करते हैं,
समयानुसार छुट्टी की घंटी की आवाज़ सुनते हैं।
खुश होकर राष्ट्रभक्ति के लिए राष्ट्रगान को गाते हैं।

देशभक्ति के वास्ते वतन पर डटते हैं,
ग्राम-वासिनी माँ भारती के चरण पर
निज प्राण व मस्तक को रखते हैं।
मेरे प्यारे बच्चों, आइए हम सब मिलकर
यूँ ही साथ-साथ आगे बढ़ते हैं।

सुबाला कुमारी,
विशिष्ट शिक्षिका
विद्यालय – उ० उ० म० विद्यालय बिशनपुर, जिच्छो, गोराडीह
जिला भागलपुर, राज्य बिहार

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