शीत ऋतु की दस्तक – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
गुनगुनी धूप का मीठा साया,
लो सर्दी का मौसम आया।
दिन छोटे और रातें लंबी,
कोहरे की चादर ने सबको लपेटा।
चाय, सूप और गाजर का हलवा,
गरमा-गरम खान-पान का जलवा।
स्वेटर, जैकेट, मफलर और टोपी,
हर घर में कपड़ों की बदली है गोटी।
पर इस मौसम में छुपा एक चोर है,
सर्दी-जुकाम का भी रहता जोर है।
छींक, खांसी और बहती नाक,
वायरस जब दिखाता है अपनी साख।
गले में खराश और बदन में थकान,
राइनोवायरस ले लेता है इम्तिहान।
हाथ धोएं और रखें अपना ध्यान,
तभी खुशहाल रहेगा हर इंसान।
काढ़े की चुस्की और भाप का सहारा,
तुलसी-अदरक का नुस्खा है प्यारा।
रबी की फसलें खेतों में मुस्काएं,
धुंध और ठंड में सब सेहत बनाएं।
दूरी बनाकर और पाकर आराम,
हफ्ते-दस दिन में तमाम हो जुकाम।
हंसते-मुस्कुराते कटे यह ऋतु सुहानी,
सुरक्षित रहें तो हर सुबह है दीवानी।
धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
प्राथमिक विद्यालय रेही टोला
रानीगंज अररिया

