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तत्व-काया-धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

Dharmendra Kumar Thakur

Dharmendra Kumar Thakur

पंच तत्व से बनी है काया,

जिसने सारा संसार रचाया।

पृथ्वी की गोदी, जल की धारा,

अग्नि का तेज, वायु का सहारा,

और आकाश का असीम पसारा।

पाँच सखियाँ ज्ञान करातीं,

जगत का अनुभव हमें करातीं।

नाक सूँघे गंध सुहानी,

जीभ चखे रस मीठा पानी।

आँखें देखें सुंदर रूप,

त्वचा छुए स्पर्श की धूप।

कान सुनें शब्दों की तान,

यही है ज्ञानेंद्रियों का वरदान।

पाँच कर्म के दूत यहाँ हैं,

जीवन को जो गति देते हैं।

वाणी बोले मीठे बोल,

हाथ करें पुरुषार्थ अनमोल।

पैर बढ़ाएं प्रगति की राह,

उपस्थ और पायु निभाएं विसर्जन का थाह।

मन के भीतर का जो महल है,

चार स्तंभों पर वो अचल है।

मन में उठती तरंग अपार,

चित्त संजोए यादों का संसार।

बुद्धि करे सही-गलत का ज्ञान,

अहंकार जगाए ‘मैं’ का भान।

चौबीस तत्वों की यह अनुपम माला,

प्रकृति ने कैसा जादू डाला।

इस सुंदर घट में ईश्वर का वास है,

यही मानव जीवन का असली प्रकाश है।

                     धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

               प्राथमिक विद्यालय रेही टोला

                        रानीगंज अररिया 

                            

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