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शिक्षा और समाज – नीतू रानी

Nitu Rani

Nitu Rani

शिक्षा और समाज
बिना शिक्षा के मिटै न अंधकार।

शिक्षा से समाज का
होता अधिक विकास,
पढ़-लिखकर शिक्षित होंगे
हमारे देश के सभी समाज।

हमारे समाज में बच्चे, बूढ़े, नर- नारी को
निःशुल्क शिक्षा दे रही सरकार,
किसी के जीवन में शिक्षा
नही जाती कभी बेकार।

एक शिक्षित पढ़ी लिखी बहू
जब आती है ससुराल,
अंधेरे घर में शिक्षा की रौशनी से
फैला देती है प्रकाश।

घर आती माँ सरस्वती
भर के ज्ञान की थाल ,
ऊपर से माता लक्ष्मी
भर देती है भंडार।

शिक्षा से घर शिक्षा से परिवार
शिक्षा से गाँव शिक्षा से समाज,
शिक्षा से व्यवहार शिक्षा से संस्कार
बिना शिक्षा के न मिटे अहंकार।

शिक्षा से ज्ञान शिक्षा से प्रकाश
शिक्षा हीं जीवन जीने का आधार,
शिक्षा हीं लाता रुप में निखार
शिक्षा हीं सिखलाता है सदाचार।

जिस समाज में है शिक्षा
वहाँ है खुशियों की बहार,
वहाँ के बच्चे पढ़ लिखके
कर रहे सभी रोजगार।

हर समाज में फैल रहा
अभी शिक्षा का प्रकाश,
बच्चों के लिए दे रही रुपए
सरकार हजारो- हजार।

निःशुल्क खाना, कपड़ा और बैग
स्कूल में दे रही सरकार,
इसी से और सजग हो गए
शिक्षा के लिए समाज।

बच्चे पढ़- लिखकर किताब लिखेंगे
लेखक बनेंगे जैसे हरिवंशराय बच्चन,
डीएम बनेंगे आईपीएस बनेंगे
लोग बनेंगे दुर्जन से सज्जन।

शिक्षा, समाज है बहुत बड़ा
इसपर लिखी हूँ मैं बहुत कम,
समाज में शिक्षा का जल रहा दीपक
इसलिए है नही मुझे अब गम।

नीतू रानी ( विशिष्ट शिक्षिका)
स्कूल -म०वि० रहमत नगर सदर मुख्यालय पूर्णियाँ बिहार।

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