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“अद्भुत लीला कान्हा की” – उमेश कुमार सिन्हा 

Umesh Kumar Sinha

Umesh Kumar Sinha

“अद्भुत लीला कान्हा की” – उमेश कुमार सिन्हा 

भादों की पावन अष्टमी, आई लेकर रात,
देवकी के घर जन्मे कान्हा, लेकर नई प्रभात।
कंस के अत्याचार से, धरती थी घबराई,
धर्म बचाने कृष्ण-कन्हैया ने, जग में ली अंगड़ाई।

यमुना ने भी राह बनाई, चरण-कमल को छूकर,
वसुदेव पहुँचे नंदगाँव, कान्हा को संग लेकर।
यशोदा की गोद में खेलें, नंद के बने दुलारे,
माखन चुराकर हँसते कान्हा, ग्वाल-बाल के प्यारे।

मुरली की मधुर तान से, मन का मोर नचाया,
गोवर्धन को उँगली पर धर, गोकुल को बचाया।
कंस का अंत कर जग को, धर्म-पथ दिखलाया,
सत्य, प्रेम और कर्म का, सुंदर पाठ पढ़ाया।

आज जन्मदिन है कान्हा का, सजा हुआ संसार,
हर मन-मंदिर में बस जाए, नंदलाल सरकार।
प्रेम जगे हर हृदय में, मिट जाए अंधकार,
जय श्रीकृष्ण! जय नंदलाल! गूँजे जय-जयकार!

स्वरचित, रचनाकार
उमेश कुमार सिन्हा निर्देशक
डिसेंट एकेडमी बाया स्कूल रघुनाथपुर
अंचल-ब्रह्मपुर, जिला – बक्सर

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