राधा बिन कान्हा कैसे जन्म मनाएँ – उमेश कुमार सिन्हा
कृष्ण-कन्हैया का आज जन्मदिन आया है,
वृंदावन सज-धजकर जगमगाया है।
प्रेम-मंदिर में स्वर्ग-सा उल्लास छाया है,
राधा हर्षित हैं—कान्हा का बुलावा आया है।
वर्ष भर में आज का दिन ही मुस्काया है,
हर ग्वाल-बाल को जन्मदिन का पैगाम आया है।
बिन राधा के दीप सुशोभित कैसे होंगे,
प्रेम बिना ये दीप प्रज्वलित कैसे होंगे?
आज ब्रज के ग्वाल-बाल जन्मदिन मनाएँगे,
मटकी फोड़ेंगे, माखन खाएँगे।
राधा संग गोपियाँ सुनेंगी कान्हा की मुरली की धुन,
उसकी तान पर झूम उठेगा सारा गोकुल-वन,वृदावन।
गैया मैया अपने दूध का उपहार लाएगी,
घी के दीपों से धरती जगमगाएगी।
चारों ओर भक्ति की सुगंध महक जाएगी,
कान्हा की छवि हर आँख में बस जाएगी।
रुक्मिणी होंगी, सत्यभामा भी आएँगी,
जामवंती भी मंगल गीत सुनाएँगी।
मगर राधा के प्रेम-भाव के आगे,
सबके भाव फीके पड़ जाएँगे।
कान्हा का जन्मोत्सव भला कैसे मनाएँ,
जब राधा ही प्रेम की ज्योति न जलाएँ?
राधा बिन कान्हा कैसे जन्म मनाएँ,
प्रेम बिना कान्हा कैसे मुस्काएँ?
स्वरचित, रचनाकार:- उमेश कुमार सिन्हा
डिसेंट एकेडमी वाया स्कूल रघुनाथपुर, अंचल- ब्रह्मपुर, जिला – बक्सर

