पद्यपंकज padyapankaj,Teachers Of Bihar,ToB PadhyaPankaj रग-रग में बसे कान्हा – उमेश कुमार सिन्हा

रग-रग में बसे कान्हा – उमेश कुमार सिन्हा


Umesh Kumar Sinha

लेख सुनें तैयार

रग-रग में बसे कान्हा – उमेश कुमार सिन्हा

कान्हा हर प्राणी की रग-रग में हैं,
अनुभूति करके देखो जी।
उनके आदर्शों और गीता का,
रसपान करके देखो जी।

कर्म-पथ पर जो बढ़ता जाए,
हर संकट से वह संभल जाए।
ईश्वर की वाणी एक बार होती,
बार-बार वे नहीं आते।

अपने कर्मों को छोड़कर प्राणी,
दूजों से सुख कहाँ पाते?
साधारण मानव नहीं अकेला,
उसके संग देवगण आते।

कर्म की बागडोर हर प्राणी को,
ईश्वर ने स्वयं थमाई है।
जो विकल्प स्वयं चुनता मानव,
वैसी ही राह बनाई है।

फिर क्यों इस मानव जीवन में,
माया के जाल में पड़ते हो?
कान्हा का संदेश समझकर,
क्यों अपने कर्म से हटते हो?

स्वरचित, रचनाकार:-
उमेश कुमार सिन्हा निर्देशक
डिसेंट एकेडमी वाया स्कूल रघुनाथपुर
अंचल- ब्रह्मपुर, जिला बक्सर

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