अमृत बरसाती चाँदनी – उमेश कुमार सिन्हा
शरद पूर्णिमा आई है, चाँदनी छिटक रही अपार,
धवल चाँद की छटा निराली, सज उठा नभ का संसार।
तारों ने मोती बिखराए, मंद-मंद बहती पुरवाई,
भक्ति, प्रेम और श्रद्धा लेकर, शुभ घड़ी फिर आज आई।
सोलह कलाओं से पूर्ण चंद्रमा, नभ में शोभा पाता है,
उसकी शीतल उजली किरणें, मन में शांति जगाती हैं।
लोकमान्यता है, इस रात अमृत बरसता चाँदनी से,
धरती का कण-कण निखर उठता, चंद्रकिरण की रागिनी से।
वृंदावन की पावन धरती, यमुना का निर्मल किनारा,
मुरली की मधुरिम तान सुनाकर, मोहन ने सबको पुकारा।
श्रीकृष्ण की महारास लीला, प्रेम-सुधा बरसाती है,
भक्ति और समर्पण की महिमा, जन-जन को समझाती है।
राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम का, अनुपम दृश्य सुहाना,
मुरली की धुन, गोपियों का मन, वृंदावन का मुस्काना।
रास रचैया नंदकिशोर की, लीला बड़ी निराली है,
शरद चाँदनी में प्रेम-भक्ति की, बहती अमृत-धारा है।
घर-आँगन में दीप जलाकर, माँ लक्ष्मी का ध्यान करें,
धूप, दीप, पुष्प और नैवेद्य से, चरणों का सम्मान करें।
कहते हैं, माँ पूछती हैं—“कौन जागता इस रात?”
जागरण, श्रद्धा और सद्कर्मों से, पावन हो हर बात।
दूध-चावल की खीर पकाएँ, प्रेम-स्नेह मिल जाए,
माँ लक्ष्मी को भोग लगाकर, मन श्रद्धा से भर जाए।
चाँदी की अंगूठी रखकर, खीर को ढककर रख दें,
चंद्रमा की उजली किरणों में, अपनी आस्था व्यक्त करें।
मध्यरात्रि में चंद्र निहारें, करें चंद्रमा का ध्यान,
शीतलता, शांति और समृद्धि का, माँगें शुभ वरदान।
कहते हैं, इस पूर्णिमा की रात, चाँद बड़ा मनभावन है,
भक्ति, आशा और सद्भाव का, संदेश बड़ा पावन है।
रात ढले, जब भोर खिलेगी, नया उजाला आएगा,
खीर रूपी पावन प्रसाद, सबके मन को भाएगा।
परिवार संग बाँटें प्रसाद, प्रेम बढ़े हर द्वार,
सुख-समृद्धि और सद्बुद्धि से, महके जीवन-संसार।
हे लक्ष्मी माँ! कृपा बरसाना, सबके घर खुशहाली हो,
मेहनत करने वाले जन की, झोली सदा निराली हो।
श्रीकृष्ण की भक्ति हृदय में, प्रेम सभी में छाए,
शरद पूर्णिमा का पावन पर्व, मंगलमय हो जाए!
चमके चंदा, महके आँगन, प्रेम-सुधा बरसाए,
शरद पूर्णिमा का पावन पर्व, सबके जीवन में सुख लाए!
उमेश कुमार सिन्हा “निर्देशक”
डिसेंट एकेडमी वाया स्कूल रघुनाथपुर
तुलसी पथ लाला पुल रघुनाथपुर
अंचल – ब्रह्मपुर
जिला – बक्सर

