अनजान सफ़र – पुनम कुमारी
एक नई राह कुछ अधूरे ख्वाब
अनजान सफ़र पर निकले हैं हम,
दिल में कुछ उम्मीदें लिए,
रास्ते भी हैं अनदेखे से,
आँखों में कुछ सपने लिए।
न मंज़िल का पता है हमको,
न राहों की पहचान है,
फिर भी दिल में हौसला है,
कुछ कर गुज़रने की ठान है।
कभी धूप मिलेगी राहों में,
कभी छाँव का सहारा होगा,
कभी आँखों में आँसू होंगे,
कभी खुशियों का नज़ारा होगा।
कुछ अपने पीछे छूटेंगे,
कुछ अजनबी अपने बन जाएँगे,
कुछ रिश्ते वक़्त के साथ मिटेंगे,
कुछ उम्र भर याद आएँगे।
हर मोड़ पर एक कहानी होगी,
हर ठोकर एक सीख दे जाएगी,
जो आज हमें अनजान लगे,
कल वही राह पहचान बन जाएगी।
मंज़िल मिले या न मिले,
इस बात का अब ग़म क्या करना,
सफ़र को ही जीवन मानकर,
हर पल को दिल से जीना।
क्योंकि ज़िंदगी का सच यही है,
हर राह का अंजाम नहीं मिलता,
जो हिम्मत से चलते रहते हैं,
उन्हें सफ़र में ही मुक़ाम मिलता है।
अनजान सफ़र है, तो क्या हुआ,
दिल में उजाला बाकी है,
जब तक साँसों में उम्मीद रहे,
हर सुबह नया रास्ता
पुनम कुमारी
उच्च माध्यमिक विद्यालय, करजा
प्रखंड — शाहपुर, जिला — भोजपुर*

