अभी उम्मीद बाकी है- उमेश कुमार सिन्हा ‘निर्देशक ‘
हर कहानी का अंत कहाँ, कुछ पन्ने शेष भी रहते हैं,
बुझती हुई आँखों में भी, कुछ सपने बसे रहते हैं।
बीते कल की धूल हटाकर, आज को कभी निहार ले ,
सूनी राहों के आगे भी, कुछ फूल खिले रहते हैं।
हर चेहरा एक-सा नहीं, हर रिश्ता छल नहीं होता,
बादल कितना भी घना हो, सूरज ओझल नहीं होता।
एक ठोकर से राहों का, विश्वास न खो दे ,
किसी अनजाने हाथ में भी, अपनापन मिल सकता है।
जो बीत गया, उसे जाने दे, मन के द्वार खुले रहने दे ,
जीवन की अगली सुबह के लिए, एक दीप जले रहने दे ।
किसी की मीठी मुस्कान में, अपना आकाश मिल जाएगा,
मन के सूने आँगन में फिर, कोई फूल खिल जाएगा।
स्वरचित , रचनाकार:-
उमेश कुमार सिन्हा निर्देशक
डिसेंट एकेडमी वाया स्कूल रघुनाथपुर
बिहार सरकार द्वारा पूर्णतः स्वीकृत विद्यालय
गोस्वामी तुलसी दास पथ लालपुल रघुनाथपुर
अंचल – ब्रह्मपुर (श्री ब्रह्मेश्वरनाथ धाम)
जिला – बक्सर

