दोहा – राम किशोर पाठक
दोहे
छाया पति मार्तण्ड का, स्वागत करती भोर।
पक्षीगण गायन करें, नृत्य करे वन मोर।।
सप्तवर्ण आभा लिए, प्रकट हुए संसार।
देख तेज डरकर तिमिर, डाल दिया हथियार।।
होते रथ आरूढ़ ज्यों, अरुणाचल में सूर्य।
कण-कण धरती का खिले, बजने लगता तूर्य।।
पंखुरी अपनी खोलकर, स्वागत करता पद्म।
त्राहिमाम करता तिमिर, छिप जाता भय छद्म।।
“पाठक” कर जोड़े खड़े, झुका रहे हैं शीश।
वेदात्मा करिए कृपा, प्रकट तुम्ही जगदीश।।
गीतकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
प्राथमिक विद्यालय कालीगंज उत्तर टोला, बिहटा, पटना, बिहार।
संपर्क – 9835232978
0 Likes

