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ज्ञान की नशाशाला – उमेश कुमार सिन्हा 

Umesh kumar sinha

ज्ञान की नशाशाला – उमेश कुमार सिन्हा 

जिज्ञासु हैं पढ़ने वाले, कविता मेरी ज्ञान की नशाशाला,
अक्षर-अक्षर बोध यहाँ है, शब्द-शब्द है प्याला;
चिन्तन इसका साकी बनकर, सत्य का मार्ग दिखाता है,
कविता का हर पक्ति पावन, ज्ञान की नशाशाला!

“जग जिसे नशा समझता है, वह तो पल भर का छल है,
ढल जाती है रात शराब की, बचता केवल मरुस्थल है,
मै जिस साकी की बात करूं, वह जीवन में रौनक लाती,
मिटा दे जो अज्ञान का तम, वह पावन मेरी ज्ञान की नशा शाला”
पुस्तकों के पन्नो की सुगंध में जिसने अपना होश गवाया
संगणक, इतिहास, भूगोल, गणित को जिसने अपना मीत बनाया
रजनी में जगकर जो लड़ते, शब्दों के गलियारों में
उन जागती आंखों का जो सपना, वह पावन मेरी ज्ञान की नशाशाला!”
“बोतल का नशा तो मानव को पशु जैसा अज्ञानी कर देता है,
पर ज्ञान का प्याला जीवन में सत्-विवेक ही भर देता है,
जो झुका दे मस्तक घमंड का और मन में विनम्रता ले आए
बुद्धि की उस निर्मल गंगा का सच्चा घट मेरी ज्ञान का नशा शाला!”
मैदान में जो थककर भी, रुकने का नाम नहीं लेता,
लक्ष्य साध कर जो अर्जुन सा पीछे पैर नहीं देता,
कर्म और खेल का यह अनूठा रंग जहां पर जमता है,
हर सच्चे राही का मस्तक जहां झुके वह ज्ञान की नशा शाला

रूप धन का यह अंधा नशा मानव को विलासी बना देता है,
पर गुण-कला का पावन प्याला,
ऊंचाइयों पर ले जाता है,
समय जहां रूप के चेहरे पर झुर्रिया लगा दे, पर जहाँ
गुणों से सजे सम्मानित जीवन का सच्चा शिल्प मेरी ज्ञान का नशाशाला!

स्वरचित रचनाकार:-
उमेश कुमार सिन्हा निर्देशक
डिसेंट एकेडमी वाया स्कूल रघुनाथपुर
बिहार सरकार द्वारा पूर्णतः स्वीकृत विद्यालय
गोस्वामी तुलसीदास पथ लालापुल रघुनाथपुर
अंचल – ब्रह्मपुर, जिला – बक्सर

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