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जीवन की कहानी में सबका अपना अपना रोल – उमेश कुमार सिन्हा

जीवन की कहानी में सबका अपना-अपना रोल

जीवन की कहानी में सबका अपना-अपना रोल है,
जगह-जगह पर निकलता सु-स्वर का बोल है।
न ही कोई अच्छा और न ही कोई वक्लोल,
अपने स्वर-सरगम की धुन गाए,
लेकर अपने स्वार्थ-निःस्वार्थ सेवा की टोटली पोटली,
पोटली खोल बजाए ढोल,
नाच दिखाए मदारी का।

यह संसार एक तमाशा-खेल है,
खेल खेले तो खिलाड़ी है,
तमाशा करे तो अनाड़ी है।

जीवन की कहानी में सबका अपना-अपना रोल,
जगह-जगह पर निकलता सु-स्वर का बोल।
न ही कोई अच्छा, न ही कोई वक्लोल।

जीवन में इंसान बन आए हैं तो
सेवा-धर्म निभाए,
कड़वी बातों का तीखापन
मीठी बातों से दूर करे।

एक के नम्र होने से बात बन जाती है,
दोनों कड़वे हुए तो बात बिगड़ जाती है।
इंसान है तो समाधान करना सीखे,
खलनायक से हटकर
नायक का रोल निभाना सीखे।

जीवन की कहानी में सबका अपना-अपना रोल है,
जगह-जगह पर निकलता सु-स्वर का बोल है।
न ही कोई अच्छा और न ही कोई वक्लोल।

स्वरचित रचनाकार:-
उमेश कुमार सिन्हा ‘निर्देशक ‘
डिसेंट एकेडमी वाया स्कूल रघुनाथपुर
गोस्वामी तुलसीदास पथ लालापुल रघुनाथपुर अंचल- ब्रह्मपुर (श्री ब्रह्मेश्वरनाथ धाम)
जिला – बक्सर

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