Site icon पद्यपंकज

कन्या पूजन – बेबी अर्चना

Archna Kumari

Archna Kumari

कन्या पूजन – बेबी अर्चना

अष्टमी को सब करते हो कन्या पूजन
बाद उसके फिर क्यों बदल जाता मन
पाशविक जो तुम व्यवहार हो करते
क्या पूर्णत: सुसुप्त हो गया अन्तर्मन

मत भूलो वह करती सृष्टि का सर्जन
सदा ही सहती रख निज हिय पाहन
पर बात गर मर्यादा-संस्कार की आती
धधकती ज्वाला-सी कर जाती गर्जन

कर्मपथ पर जलती दीपशिखा सी
समर्पित रहती वह निर्मल सरिता सी
है ममता, त्याग और दया की मूरत
बसती उनमें नवदुर्गा की नौ शक्ति भी

नवपल्लव भी उनसे ही पाते नवजीवन
है उनसे ही स्पंदित विश्व का कण-कण
स्नेहिल भावनाएँ अंतस समाहित उनके
अनंत शाखाएँ बनाती भविष्य का दर्पण

अब तो छोड़ो अंतस के विकार वमन
पश्चाताप करो हटा अपना छद्मआवरण
संस्कार को अपने इतना भी ना गिराओ
कि खुद ही धिक्कारे तुझे तेरा अंतर्मन

उनसे ही सुरभित होता जग-संसार
मत भूलो है उनको भी जीवन-अधिकार
आओ लें संकल्प समभाव, समदृष्टि का
तभी ही होगा कन्या-पूजन पूर्ण साकार

बेबी अर्चना
मध्य विद्यालय कुआड़ी

0 Likes
Spread the love
Exit mobile version