गुरुवर – बेबी अर्चना
ज्ञान के चक्षु खोल गुरूवर
हमपे किया अनन्त उपकार
नवल चेतना-नव प्रकाश से
सबका जीवन किया उद्धार
रवि सम गुरूवर तेरी ऊर्जा
है अंबर सा अनंत विस्तार
सद्सान्निध्य में रह कर तेरे
ले माटी भी सुदृढ़ आकार
हरते हर लघुता जीवन की
संपूर्ण गुरुता का देते उपहार
उनकी महिमा चतुर्दिक फैले
उनके ही चरणन मुक्ति-द्वार
आदि है ना अंत गुरू का
करे अंतस के दूर अंधकार
कभी डाँट से कभी प्यार से
जीवन बनाते सरस साकार
सींच बुद्धि को असीम ज्ञान से
करते उत्तम सबका व्यवहार
दिव्य ज्योत जलाते अलौकिक
हैं अगणित असीमित उपकार
मानवता का हर पुष्प मनोहर
धरा गगन अपरिमित विस्तार
गुरू ही तो बागबान चमन के
महकता उनसे ही सारा संसार
गुरू बिन दिशाहीन-सा जीवन
ज्यों चतुर्दिश हो गहन अंधकार
ज्योत जला सद्ज्ञान का गुरूवर
करते आलोकित सबका संसार
मिलता जब आशीष गुरू का
हर भवसागर हो जाता पार
है समर्पित कोटि श्रद्धा सुमन
उनकी महिमा है अनंत अपार
बेबी अर्चना
मध्य विद्यालय कुआड़ी
प्रखंड कुर्साकांटा जिला अररिया

