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मित्र-रूचिका

Ruchika

दवा,दुआ,इल्तिज़ा में उठे जिसका हाथ है,

वह मित्र है जो जुदा होकर भी साथ है।

जो मन की भित्ति को बिना कुंजी खोले,

जो बातों को समझे ,नही कभी उसे तौले,

जो हँसी में साथ दें और दर्द में पुचकार दे

जो साथ निभाये मौन नही कुछ भी बोलें।

वह मित्र है जो जुदा होकर भी साथ है।

जो बेपरवाही को परवाह से सदा सँवारे,

जो साथ निभाए चाहे रिश्ता कोई बिगाड़े,

जो व्यस्तताओं का नही बनाए बहाना,

पड़ी जरूरत जब भी वह खड़ा रहे द्वार।

वह मित्र है जो जुदा होकर भी साथ है।

जिसके हाथ में रहे सदा खुशियों की कुंजी,

जो है हमारे जीवन की अनमोल पूँजी,

जो भरपूर प्यार भी दे और सम्मान भी,

जिसकी बातें सपनों में भी सदा गूँजी।

वह मित्र है जो जुदा होकर भी साथ है।

रूचिका

प्रधान शिक्षक

राजकीयकृत प्राथमिक विद्यालय कुरमौली गुठनी सिवान

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