एक-एक रुपया जोड़-जोड़कर गुल्लक अपनी भर लाई, दादी के घर बड़े जतन से मैंने एक गुड्डा बनवाई। नानी के घर[...]
Category: Hall of Fame August 2026
स्वतंत्रता का अमर प्रण – उमेश कुमार सिन्हास्वतंत्रता का अमर प्रण – उमेश कुमार सिन्हा
स्वतंत्रता-दिवस आया है, हर आँगन उल्लास समाया है। केसरिया, श्वेत, हरा तिरंगा, गर्व से नभ में लहराया है। ज्यों ही[...]
सेवाभावी की अभिलाषा -उमेश कुमार सिन्हासेवाभावी की अभिलाषा -उमेश कुमार सिन्हा
नहीं चाहूँ स्वर्णिम वैभव का मुझ पर राजतिलक हो, नहीं चाहूँ यश का सूरज मेरे ही आँगन उदित हो। नहीं[...]
दोस्ती-रूचिकादोस्ती-रूचिका
दोस्ती नही कभी आजमायी जाती, ये तो बस आपस में निभाई जाती। ऊंच नीच का फर्क नही है दोस्ती में[...]
मित्र-रूचिकामित्र-रूचिका
दवा,दुआ,इल्तिज़ा में उठे जिसका हाथ है, वह मित्र है जो जुदा होकर भी साथ है। जो मन की भित्ति को[...]
