सर्वश्रेष्ठ यह भारत अपना- चंद्रवर्त्म वर्णिक छंद गीत – राम किशोर पाठक
विश्व-बोध नित लेकर सपना।
सर्वश्रेष्ठ यह भारत अपना।।
नाग-तुंग नभ छूकर कहते।
देव-भूमि सुर आकर रहते।।
दिव्य लोक सम दर्शन करते।
नित्य धर्म-पथ चिंतन वरते।।
कर्म-मार्ग पर वांछित तपना।
सर्वश्रेष्ठ यह भारत अपना।।०१।।
वीर-धीर जन रक्षक इसके।
द्वेष-भाव उर भक्षक इसके।।
श्रेष्ठ शौर्य रण-कौशल रखते।
शत्रु-नाश सम तक्षक करते।।
शीश काट रखते रिपु नपना।
सर्वश्रेष्ठ यह भारत अपना।।०२।।
संत-विज्ञ खुखदायक कहते।
राष्ट्र-भक्ति शुभनायक गहते।।
प्रेम-पुण्य पथ सुंदर लहते।
बंधु-भाव रख प्रेमिल रहते।।
राम, श्याम, शिव को नित जपना।
सर्वश्रेष्ठ यह भारत अपना।।०३।।
गीतकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
सियारामपुर, पालीगंज, पटना, बिहार।
संपर्क- ९८३५२३२९७८
0 Likes

