बचपन की शरारतें – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

जब कोई फल भाता, दूर से नज़र आता, छिप कर बागानों से, टिकोले को तोड़ता। गाँव की हीं महिलाएँ, कुएँ पर पानी भरें, पीछे से कंकड़ मार, मटके को फोड़ता।…

जलहरण घनाक्षरी छंद – जैनेन्द्र प्रसाद “रवि’

प्रभाती पुष्प जलहरण घनाक्षरी छंद हमेशा मगन रहें ईष्ट का भजन करें, वृथा नहीं नष्ट करें, समय को पल भर। कदम बढ़ाएं सदा फूंक-फूंक कर हम, जीवन में पड़ता है,…

परीक्षा परिणाम- दीपा वर्मा

आया परिणाम बच्चों का, उत्साह देखते बनता है। कुछ बच्चे हैं डरे-डरे, जाने क्या मेरा होना है। नए वर्ग मे जाना है,नयी किताबें, नयी कापियां, नया बैग ,सजाना है। परीक्षा…

आया जनवरी –

आया जनवरी छाया कुहासा, फूलने लगा है मेरा स्वांसा । आया फरवरी फेके रजाई, धूप में बैठकर ले रहे जम्हाई। मार्च आया होली आई, बच्चों में खुशियाली छाई। अप्रैल में…

प्यारी गुड़िया- मीरा सिंह “मीरा

नन्ही मुन्नी प्यारी गुड़िया सबकी राज दुलारी गुड़िया। तितली जैसी उड़ती फिरती खुशियों की किलकारी गुड़िया।। कभी गले से आकर लिपटी कभी खफा हो जाती गुड़िया। करके कोई नयी शरारत…