Bhakti-पद्यपंकज

सरस्वती वन्दना- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

दे विमल बुद्धि भावना, माँ शारदे है प्रार्थना , ऐसी शक्ति दे मां कर सकूं, हर संकटों का सामना। बालक बड़ा नादान हूं, धर्म-कर्म से अनजान हूं, जैसा भी हूं…

माता वीणापाणि- कुमकुम कुमारी “काव्याकृति”

छोड़कर घर-द्वार,कर सबसे किनार, पढ़ने आए हम माँ,तप पूर्ण कीजिए। देकर ज्ञान का दान,माँ करो मेरा कल्याण, बन जाऊँ विद्यावान, शरण में लीजिए। जय माँ वरदायिनी, जय ज्ञान प्रकाशिनी, सफल…

कृष्ण को प्रणाम है-एस.के.पूनम

मनहरण घनाक्षरी पुकारीं दुलारी राधा,ढूंढ़ती फिरती कान्हा, नयन निहारी राह,पूछी कहाँ श्याम हैं। मुकुट शोभित भाल,बाँहों पर भुजबंध, कंठमाला मोतियों का,वही घनश्याम हैं। यमुना किनारे बंसी,बजाए मुरलीधर, श्रवण करती राधा,केशव…

मनहरण घनाक्षरी- एस.के.पूनम

छंद:-मनहरण घनाक्षरी “सियाराम” पहनते पीताम्बर,सियाराम साथ-साथ, भोर उठे साथ चले,प्रीतम का प्रीत है। हाथ पकड़े सिया का,कभी न अलग हुआ, घर-बार सब छुटा,करुणा अगीत है। तरनी में नाव चली,वानरों की…

सृष्टि के सृजनहार- मीरा सिंह “मीरा”

जीव जगत के आधार हे सृष्टि के सृजनहार व्यक्त करें कैसे मनुज आदित्य तेरा आभार हे देवों के देव दिवाकर सबसे बड़े जादूगर आते रहे युगों से नित नई सुबह…

भजन – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

तोहर माथे में मुकुट गले हार सोहे ला, माई दसों हाथ तोहर हथियार सोहे ला। कर में कंगन सोहे भाल सोहे बिंदिया, असुरों के देख तोहे आवे नहीं निंदिया। तोहर…

SHARE WITH US

Share Your Story on
info@teachersofbihar.org

Recent Post